Chhath Puja 2023: इस वर्ष कब है छठ पूजा? जानें- शुभ तिथि एवं धार्मिक महत्व

Monday, October 23, 2023

Chhath Puja 2023: इस वर्ष कब है छठ पूजा? जानें- शुभ तिथि एवं धार्मिक महत्व

Chhath Puja 2023 छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन व्रती स्नान ध्यान के बाद सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करती हैं। इसके पश्चात विधि विधान से पूजा करती हैं। पूजा समापन के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं।

नई दिल्ली। Chhath Puja 2023: सनातन पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को आस्था का महापर्व छठ मनाया जाता है। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अगले दिन उगते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इसके अगले दिन खरना मनाया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास कर शाम में पूजा करने के पश्चात प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके पश्चात लगातार 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। सनातन धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। महाभारत काल में द्रौपदी भी छठ पूजा करती थीं। धार्मिक मान्यता है कि छठ पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। वर्तमान समय में छठ पूजा बिहार समेत देश विदेश में मनाई जाती है। आइए, छठ पूजा की शुभ तिथि एवं धार्मिक महत्व जानते हैं-

 

शुभ मुहूर्त :-

19 नवंबर, 2023 सूर्यास्त का समय: शाम 5 बजकर 26 मिनट 20 नवंबर, 2023 सूर्योदय का समय: सुबह 06 बजकर 47 मिनट पर

छठ पूजा 2023 

17 नवंबर, 2023 : नहाय खाय 

18 नवंबर, 2023 : खरना 

19 नवंबर, 2023 - छठ पूजा, डूबते सूर्य को अर्घ्य 

20 नवंबर, 2023 - उगते हुए सूर्य को अर्घ्य, छठ पूजा का समापन और पारण

नहाय खाय:-

छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन व्रती स्नान ध्यान के बाद सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करती हैं। इसके पश्चात विधि विधान से पूजा करती हैं। पूजा समापन के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन लौकी की सब्जी खाना अनिवार्य है। अतः व्रती चावल-दाल के साथ लौकी की सब्जी जरूर खाती हैं।

खरना:-

छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना मनाया जाता है। इस दिन व्रती ब्रह्म बेला में उठती हैं और सूर्य देव को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करती हैं। नित्य कर्मों से निवृत होने के पश्चात गंगाजल युक्त पानी से स्नान करती हैं। सुविधा रहने पर नदी और सरोवर में आस्था की डुबकी लगाती हैं। इसके पश्चात विधि विधान से पूजा कर व्रत करती हैं। दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। रात में कुल देवी-देवता के समक्ष छठ मैया की पूजा कर भोजन ग्रहण करती हैं। पूजा में खीर पूड़ी का प्रसाद भोग लगाया जाता है। व्रती खीर खाकर अगले 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। खरना की रात्रि में छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य:-

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठी मैया और सूर्य देव की पूजा-उपासना होती है। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

उगते सूर्य को अर्घ्य

छठ पूजा का समापन चौथे दिन होता है। इस दिन सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

मिथिलावासी लेल हवाई यात्रा किएक महग अछि ?

हवाई यात्रा आधुनिक जीवनक अभिन्न अंग बनि गेल अछि, जे दुनियाक कोन-कोनसँ लोकसभकेँ जोड़ैत अछि। ई सुविधा आ दक्षता प्रदान करैत अछि, मुदा ई महग सेहो भऽ सकैत अछि, विशेष रूपसँ उत्तरी भारतक एकटा क्षेत्र मिथिलाक निवासीक लेल। मिथिलावासी लेल हवाई यात्राक उच्च लागतमे कतेको कारक योगदान दैत अछि, आ एहि ब्लॉगमे हम एकर पाछूक किछु प्रमुख कारणक पता लगाब।


सीमित हवाई अड्डा : मिथिलामे प्रमुख हवाई अड्डाक अभाव अछि, आ निकटतम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रायः काफी दूरी पर रहैत अछि। एकर अर्थ अछि जे निवासीसभकेँ एहि हवाई अड्डा धरि पहुँचबाक लेल अतिरिक्त खर्च आ समय उठाबय पड़ैत छैक, जाहिसँ हुनकर यात्राक समग्र लागत आओर बढ़ि जाइत छैक। लगक हवाई अड्डाक अभावमे मिथिलावासीक लेल हवाई यात्रा कम सुलभ भऽ जाइत अछि।


सीमित एयरलाइन विकल्प : मिथिलामे एहि क्षेत्रमे सेवा देबयवला एयरलाइन्सक विस्तृत विविधता नहि अछि। सीमित प्रतिस्पर्धाक परिणामस्वरूप प्रायः बेसी किराया होइत छैक। जखन एयरलाइन्स आ उड़ानक चयन करबाक बात अबैत अछि तखन निवासीसभक लग कम विकल्प होइत छैक। 


मौसमी माँग : कतेको अन्य क्षेत्र जकाँ मिथिलामे हवाई भाड़ाक दाममे मौसमी उतार-चढ़ावक अनुभव होइत अछि। यात्राक चरम मौसममे, जेना छुट्टी वा उत्सवक अवसरमे, एयरलाइन्स बेसी माँगक कारण अपन दाम बढ़यबाक प्रवृत्ति रखैत अछि। एहिसँ निवासीलोकनिक लेल एहि समयमे किफायती टिकट तकनाइ चुनौतीपूर्ण भऽ सकैत अछि, जाहिसँ हवाई यात्राक लागत आओर बढ़ि सकैत अछि।


सीधा उड़ानक कमी: मिथिलासँ बहुत रास उड़ानकेँ अंतिम गंतव्य धरि पहुँचबाक लेल लेओवर या कतेको पड़ावक आवश्यकता होइत छैक। लेओवरसँ न केवल यात्राक समय बढ़ैत अछि अपितु खर्चमे सेहो वृद्धि होइत अछि। यात्रीसभकेँ लम्बा लेओवरक दौरान भोजन आ आवासक लेल भुगतान करय पड़ि सकैत अछि, जाहिसँ हुनकर यात्राक समग्र लागत बढ़ि सकैत अछि।


बुनियादी ढाँचाक चुनौती : हवाई अड्डा आबय-जाय लेल कुशल परिवहन सहित उचित बुनियादी ढाँचाक अभाव मिथिलावासीक लेल हवाई यात्राक लागत सेहो बढ़ा सकैत अछि। हवाई अड्डासँ खराब सड़क सम्पर्कक लेल महग टैक्सी वा निजी परिवहन सेवा किरायापर लेबाक आवश्यकता भऽ सकैत अछि।


अतिरिक्त शुल्क: एयरलाइन्स प्रायः सामान, सीट चयन, आ उड़ानमे भोजन सन सेवाक लेल अतिरिक्त शुल्क लैत अछि। ई अतिरिक्त लागत हवाई यात्राक कुल लागतमे उल्लेखनीय वृद्धि कऽ सकैत अछि, विशेष रूपसँ कतेको बैग आ विशिष्ट बैसबाक वरीयतावला परिवार वा व्यक्तिक लेल।


बुनियादी ढाँचाक चुनौती : हवाई अड्डा आबय-जाय लेल कुशल परिवहन सहित उचित बुनियादी ढाँचाक अभाव मिथिलावासीक लेल हवाई यात्राक लागत सेहो बढ़ा सकैत अछि। हवाई अड्डासँ खराब सड़क सम्पर्कक लेल महग टैक्सी वा निजी परिवहन सेवा किरायापर लेबाक आवश्यकता भऽ सकैत अछि।


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बुनियादी ढाँचाक चुनौती : हवाई अड्डा आबय-जाय लेल कुशल परिवहन सहित उचित बुनियादी ढाँचाक अभाव मिथिलावासीक लेल हवाई यात्राक लागत सेहो बढ़ा सकैत अछि। हवाई अड्डासँ खराब सड़क सम्पर्कक लेल महग टैक्सी वा निजी परिवहन सेवा किरायापर लेबाक आवश्यकता भऽ सकैत अछि।


अतिरिक्त शुल्क: एयरलाइन्स प्रायः सामान, सीट चयन, आ उड़ानमे भोजन सन सेवाक लेल अतिरिक्त शुल्क लैत अछि। ई अतिरिक्त लागत हवाई यात्राक कुल लागतमे उल्लेखनीय वृद्धि कऽ सकैत अछि, विशेष रूपसँ कतेको बैग आ विशिष्ट बैसबाक वरीयतावला परिवार वा व्यक्तिक लेल।

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